मेरे बारे








मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख ।

मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख ।


शराफ़त से मुझे नफ़रत है ये जीने नहीं देती,
कि तुझको तोड़ लेंगे लोग तू फूलों सा खिलकर देख ।



ज़रुरी तो नहीं जो दिख रहा है सच मेँ वैसा हो
ज़मीं को जानना है ग़र तो बारिश में फिसलकर देख ।



पता लग जाएगा अपने ही सब बदनाम करते हैं ।
कभी ऊँचाइयोँ पर तू भी अपना नाम लिखकर देख ।



अगर मैँ कह नहीं पाया तो क्या चाहा नहीं तुझको
मोहब्बत की सनद चाहे तो मेरे घर पे चलकर देख ।



तुझे ही सब ज़माने में बुरा कहते हैँ क्यों 'फ़ैसल'
बिखर जाएगा यूँ ना सोच दीवाने संभलकर देख ।

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